( पंकज पाल संवाददाता  )

 

 

नर्मदापुरम – सतपुडा टाइगर रिजर्व के मटकुली रेंज के ग्राम मेहंदीखेड़ा के आस पास लगे जंगलों में बड़ी मात्रा में बेशकीमती सागौन के पेड़ काट दिए गए और उस क्षेत्र में जगह जगह कटे हुए पेड़ो के ठूँठ काफी मात्रा में देखे जा सकते है उन ठूँठो को देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये बेशकीमती पेड़ कुछ समय पहले ही काटे गए है, इतनी बड़ी मात्रा में सागौन के हरे भरे पेड़ काट दिए जाते है और वन विभाग को इसकी भनक तक नही लगती है, यह नजारा देनवा नदी के किनारे लगे मेहंदीखेड़ा के जंगलों का है जागरूक पत्रकारों ने इसकी जानकारी राजस्व विभाग ओर वन विभाग को दी तब जागा प्रशासन, यहां से अक्सर लोगो का आना जाना लगा रहता है उसके बावजूद बेख़ौफ़ होकर सागौन की कटाई की जा रही है ।

 

 

 

 

मुख्य बात यह है कि गाँवो से लगे जंगलों में वन विभाग की नाक के नीचे यह कटाई चल रही है रिहायशी इलाको से दूर जंगलों की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वहाँ क्या स्थिति होगी ? क्योंकि उन इलाको में आम जन का पहुँचना संभव नही है क्योंकि ये प्रतिबंध क्षेत्र है जहाँ वन विभाग की अनुमति के बिना नही जाया जा सकता है ।

 

 

 

 

कार्यवाही के नाम पर राजस्व और वन विभाग दोनो एक दूसरे के क्षेत्रो का हवाला दे रहे है वन विभाग के कर्मचारी इसे राजस्व का क्षेत्र बता रहे है जबकि राजस्व विभाग ने इसे वन विभाग का क्षेत्र बताया दोनो विभागों के कर्मचारी गुमराह करते नजर आ रहे है सभी के अपने अपने तर्क और बाते है, बड़ी बात रेंज में डिप्टी साहब ने तो एक सज्जन की जमीन बता दी जहां पेड़ काटे गए हैं, वही उसी सज्जन से बात हुई तो उन्होंने बताया कि मेरी कोई भी जमीन बहा है ही नहीं ।

 

 

 

 

सबसे बड़ा सवाल यह कि इस पर कार्यवाही करेगा कौन

 

 

हल्का पटवारी अनिल नायक और वन विभाग के कर्मचारियों ने कुछ पेडों के ठूँठ की नपाई कर प्रतिवेदन तैयार किया जितनी मात्रा में इन पेड़ों के ठूँठ मिले है जबकि मौके पर सिर्फ कुछ ही पेडो को कार्यवाही में लिया गया है इसमे भी अज्ञात व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है, जबकि प्रतिवेदन को लेकर स्पष्ट जानकारी प्राप्त नही हुई है ।

 

जब हमने जानकारी प्राप्त करने के लिए रेंजर साहब उमेश कुमार मारू को फ़ोन लगा कर संपर्क किया तो उन्होंने फ़ोन उठाना मुनासिब नही समझा वह अपनी रेंज क्षेत्र में कब आते है कब जाते हैं इसका भी अभाव सा ही नजर आता है, जबकि नाकेदार एवं अन्य कर्मचारियों का कहना है प्रतिवेदन रेंजर आफिस से ही प्राप्त होगा ।

 

जहा एक ओर सतपुडा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बन संरक्षण को लेकर कई प्रोजेक्ट चलाये जा रहे लाखो करोडों रुपये ख़र्च किये जा रहे है वही वन विभाग की नाक के नीचे सागौन जैसे बेशकीमती पेडो को बड़ी मात्रा में काट दिया जाता है और विभाग को कानो कान खबर तक नही होती है, ये वन विभाग के कर्मचारियों की नीरसता और लापरवाही का जीता जागता नमूना है ।

 

सतपुडा टाइगर रिजर्व का मटकुली और आस पास का क्षेत्र जहाँ अक्सर वन विभाग की नाक के नीचे कई अवैध गतिविधियों होती रहती है चाहे ट्रैक्टर ट्रॉली द्वारा देनवा नदी से अवैध रेत उत्खनन हो या जंगलो में पेड़ों की कटाई हो या फिर कोर जोन और बफर जोन में बिना अनुमति बड़ी मात्रा में रिसॉर्ट और होटल निर्माण हो वन विभाग मूक दर्शक बना देखता रहता है या ये भी कह सकते है ये सारे कार्य कर्मचारियों की मिली भगत से तो नहीं चल रहे है । बड़ा प्रश्न यह है कि इन अवैध गतिविधियों पर कैसे रोक लगेगी अगर वन विभाग ऐसे ही सोता रहेगा तो अवैध कार्य करने वालो के हौसले इतने बुलंद है कि उन्हें ना वन विभाग का डर है नाही किसी कार्यवाही का, एक मुहावरा यहां फिट बैठता है जब सैया वहे कोतवाल तो डर काहे का ।

 

सालों से एक ही जगह पदस्थ वन विभाग के अधिकारीयों ओर कर्मचारियों पर सवाल उठना लाज़िमी है, आखिर इन पर किसकी इतनी मेहरबानी हो रही है ।