( पंकज पाल संवाददाता )
नर्मदापुरम – मंगलवार शाम पश्चिमी आकाश में खगोल विज्ञान का एक बेहद दुर्लभ नजारा देखने को मिला, जब सौरमंडल के दो सबसे चमकीले ग्रह शुक्र या वीनस और बृहस्पति या जुपिटर एक-दूसरे के बेहद करीब आकर टेलीस्कोप के एक ही फ्रेम में समा गए, कंजक्शन की इस अद्भुत खगोलीय घटना को बच्चों तक पहुंचाने के लिए नेशनल अवार्ड प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू द्वारा एक विशेष स्टारगेजिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।

कार्यक्रम में अत्याधुनिक 10-इंच न्यूटोनियन रिफ्लेक्टर टेलिस्कोप की मदद से बच्चों को एक ही फ्रेम में दोनो ग्रहों का कंजक्शन दिखाया गया इसमें माइनस 3.98 मैग्नीट्यूड से चमकता हुआ चमकीला शुक्र और उसके ठीक बगल में माइनस 1.85 मैग्नीट्यूड की पीली चमक के साथ विशालकाय बृहस्पति ग्रह एक साथ दिखाई दे रहे थे, इसके साथ ही बृहस्पति के चारों प्रसिद्ध गैलीलियन चंद्रमा आयो, यूरोपा, गैनिमेड और कैलिस्टो भी चमकते नजर आए ।
इस अवसर पर विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि दिखने में भले ही ये दोनों ग्रह एक-दूसरे को छूते हुए महसूस हो रहे थे लेकिन यह केवल एक दृष्टिभ्रम या ऑप्टिकल इल्यूजन था, जुपिटर जहां पृथ्वी से लगभग 90 करोड़ 41 लाख किमी दूर था तो वीनस मात्र 17 करोड़ 92 लाख किमी दूर था लेकिन आज पृथ्वी से देखते समय हमारी दृष्टि रेखा में एक सीध में आ जाने के कारण इनका कोणीय अंतर या एंगुलर डिस्टेंस मात्र 1.5 डिग्री रह गया है जिससे यह अनोखा नजारा संभव हो सका कंजक्शन की इस घटना को बिना टेलिस्कोप की मदद के भी देखा जा सकता था, अब शुक्र और बृहस्पति की अगला दिखाई देने वाला स्पष्ट कंजक्शन 10 नवंबर 2028 को होनर्मदापुरम – मंगलवार शाम पश्चिमी आकाश में खगोल विज्ञान का एक बेहद दुर्लभ नजारा देखने को मिला, जब सौरमंडल के दो सबसे चमकीले ग्रह शुक्र या वीनस और बृहस्पति या जुपिटर एक-दूसरे के बेहद करीब आकर टेलीस्कोप के एक ही फ्रेम में समा गए, कंजक्शन की इस अद्भुत खगोलीय घटना को बच्चों तक पहुंचाने के लिए नेशनल अवार्ड प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू द्वारा एक विशेष स्टारगेजिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।
कार्यक्रम में अत्याधुनिक 10-इंच न्यूटोनियन रिफ्लेक्टर टेलिस्कोप की मदद से बच्चों को एक ही फ्रेम में दोनो ग्रहों का कंजक्शन दिखाया गया इसमें माइनस 3.98 मैग्नीट्यूड से चमकता हुआ चमकीला शुक्र और उसके ठीक बगल में माइनस 1.85 मैग्नीट्यूड की पीली चमक के साथ विशालकाय बृहस्पति ग्रह एक साथ दिखाई दे रहे थे, इसके साथ ही बृहस्पति के चारों प्रसिद्ध गैलीलियन चंद्रमा आयो, यूरोपा, गैनिमेड और कैलिस्टो भी चमकते नजर आए ।
इस अवसर पर विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि दिखने में भले ही ये दोनों ग्रह एक-दूसरे को छूते हुए महसूस हो रहे थे लेकिन यह केवल एक दृष्टिभ्रम या ऑप्टिकल इल्यूजन था, जुपिटर जहां पृथ्वी से लगभग 90 करोड़ 41 लाख किमी दूर था तो वीनस मात्र 17 करोड़ 92 लाख किमी दूर था लेकिन आज पृथ्वी से देखते समय हमारी दृष्टि रेखा में एक सीध में आ जाने के कारण इनका कोणीय अंतर या एंगुलर डिस्टेंस मात्र 1.5 डिग्री रह गया है जिससे यह अनोखा नजारा संभव हो सका कंजक्शन की इस घटना को बिना टेलिस्कोप की मदद के भी देखा जा सकता था, अब शुक्र और बृहस्पति की अगला दिखाई देने वाला स्पष्ट कंजक्शन 10 नवंबर 2028 को होगा ।













