आशीष रावत…. मध्यप्रदेश में बीजेपी के अगले प्रदेशाध्यक्ष को लेकर चर्चा तेज…

मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी में नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय होना है । जिसके लिए प्रक्रिया तो जारी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल लगातार हो रही देरी से उठ रहा है बीजेपी से जुड़े सूत्रों की मानें तो एमपी बीजेपी अध्यक्ष के लिए पार्टी अपने पुराने और आजमाए हुए फॉर्मूले पर ही भरोसा करने वाली है ।

संगठन से जुड़े सूत्रों की मानें को दिल्ली आलाकमान ने कुछ बातें पहले से ही साफ कर दी हैं, जिनके आधार पर ही अगले प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होगा । इसके लिए सीएम मोहन यादव की पसंद का भी ध्यान रखा जाएगा, क्योंकि सत्ता और सरकार के बीच तालमेल बनाए रखना सबसे अहम कड़ी होगी । इसके अलावा नेता ऐसा हो जिससे जातिगत समीकरणों को साधने में सहूलियत तो हो ही, वहीं नेता इतना अनुभवी भी हो कि वो बीजेपी की रीढ़ कहे जाने वाले संगठन को बखूबी लीड कर सके ।

क्या है पुराना फॉर्मूला….
आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में बीजेपी ने साल 2003 के विधानसभा चुनाव में 10 सालों की कांग्रेस सरकार को हटाकर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी । तब जिस फॉर्मूले पर भारतीय जनता पार्टी ने काम किया, उसने बीजेपी को मध्यप्रदेश में बेहद मजबूत स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया । यह फॉर्मूला था ओबीसी मुख्यमंत्री और सवर्ण प्रदेश अध्यक्ष का. 2003 में उमा भारती को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था जो ओबीसी वर्ग से आती हैं । उमा भारती के बाद बाबूलाल गौर, शिवराज सिंह चौहान और अब मोहन यादव एमपी के मुख्यमंत्री बने और यह चारों ओबीसी वर्ग से आते हैं । वहीं, इन सभी मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में बीजेपी के संगठन की जिम्मेदारी यानी प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा कैलाश जोशी, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रभात झा, नंदकुमार सिंह चौहान, राकेश सिंह और वीडी शर्मा को मिला जो सभी सवर्ण वर्ग से आते हैं ।

पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा और अरविंद भदौरिया मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा विधानसभा का चुनाव हार गए हैं। इसके बाद उनके लोकसभा और राज्यसभा लड़ने की अटकलें थीं लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने उन्हें न्यू ज्वाइनिंग टोली के मुखिया बनाया था। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं को बीजेपी में शामिल कराया जिस कारण से उनको इनाम मिल सकता है।

नरोत्तम मिश्रा के अलावा रीती पाठक , राजेंद्र शुक्ला , अरविंद सिंह भदौरिया का भी नाम सवर्ण उम्मीदवारों में है। अरविंद सिंह भदौरिया आरएसएस की पृष्ठभूमि से आते हैं । अरविंद सिंह भदौरिया को संगठन में काम करने का लंबा अनुभव है। वह शिवराज सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।

आदिवासी वर्ग को साधा तो कौन होगा
अगर पार्टी आदिवासी चेहरे पर दांव लगाती है तो मंडला लोकसभा सीट से सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का नाम सबसे आगे हैं। वह केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। इस बार उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया है। ऐसे में माना सकता है कि वह रेस में शामिल हैं।