मप्र की इस विधानसभा पर क्यों नहीं किया घोषित उम्मीदवार …
संजय दुबे – भोपाल केंद्रीय चुनाव समिति ने आज मप्र की आरक्षित विधान सभा में अपने उम्मीदवार घोषित किये हैं इस पहली सूची में कई वर्तमान विधायकों के टिकिट काटकर पूर्व विधायकों को उम्मीदवार बनाया गया तो कई वर्तमान विधायकों के टिकिट काट दिए , पार्टी ने प्रदेश की आरक्षित सीटों को फोकस कर पहली सूची जारी की है वहीँ प्रदेश के नर्मदापुरम जिले की आरक्षित पिपरिया विधान सभा से भाजपा क्यों नहीं कर पाई अपना उम्मीदवार घोषित जबकि इस विधान सभा को भाजपा का गढ़ माना जाता है …
केंद्रीय चुनाव समिति ने आज मप्र की आरक्षित विधान सभा में अपने उम्मीदवार घोषित किये हैं इस पहली सूची में कई वर्तमान विधायकों के टिकिट काटकर पूर्व विधायकों को उम्मीदवार बनाया गया है तो कई वर्तमान विधायकों के टिकिट काट दिए । पार्टी ने प्रदेश की आरक्षित सीटों को फोकस कर पहली सूची जारी की है वही मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले की आरक्षित पिपरिया विधान सभा से क्यों नहीं कर पाई अपना उम्मीदवार घोषित जबकि इस विधान सभा को भाजपा का गढ़ माना जाता है । नर्मदापुरम जिले की पिपरिया विधान सभा आरक्षित सीट है । इस विधान सभा में पिछले तीन बार से भाजपा के विधायक ठाकुर दास नागवंशी भारी मतों से जीतते आ रहे हैं । विधायक के रूप में ठाकुरदास नागवंशी को पार्टी अपना उम्मीदवार बना सकती थी पर इस पहली सूची से इनका नाम क्यो गायब है इस पर चर्चाओं का बाजार गर्म है ।
एक तरफ पार्टी से जुड़े जानकारों का कहना है कि आरक्षित पिपरिया विधान सभा से आम जनता में लोक्रपिय ठाकुर दास नागवंशी से मजबूत दावेदार कोई नहीं है । हाल ही में बनखेड़ी में मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान की आम सभा से ये साबित हुआ कि ठाकुरदास नागवंशी आम जनता में लोकप्रिय हैं ।
वही पिपरिया विधान सभा में पिपरिया भारतीय जनता पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं से लेकर पदाधिकारी संगठन में इस बार विधायक केंडिडेट बदलने संघठन में एंटी इंकम्बेंसी की बात कह चुके हैं । तीन बार से विधायक बनने के बाद संघठन से लेकरआम जनता में वर्तमान विधायक ठाकुरदास नागवंशी का विरोध है । जिसे लेकर राजधानी में संघठन हाई कमान के सामने पार्टी के कई पदाधिकारी उम्मीदवार बदलने की मांग रख चुके हैं ।
राजनैतिक पंडितों के अनुसार इस बार भाजपा के सामने अपने उम्मीदवार को जितना इतना आसान नहीं है । एन्टीइन्कम्बेंसी आम जनता में विधायकों का विरोध पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी जग जाहिर है । भारतीय जनता पार्टी इस बार किसी भी हालात में मप्र में फिर भाजपा की सरकार बनाना चाहती है केंद्रीय नेतृत्व ने इस बार विधान सभा चुनाव की बाग़डोर अपने हाथ ले रखी है । गृह मंत्री अमित शाह मप्र में फिर भाजपा सरकार बनाने प्रदेश के लगातार दौरे कर रहे हैं । पार्टी कई स्तर पर सर्वे कराकर वर्तमान विधायकों के रिपोर्ट कार्ड तैयार कर इस बार अपने उम्मीदवार घोषित कर रही है । आज केंद्रीय चुनाव समिति ने मध्य प्रदेश के ३९ विधान सभा सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए । पार्टी ने आरक्षित विधान सभा सीटों पर पहले फोकस करते हुए कई वर्तमान विधायकों के टिकिट काटे है तो कई पूर्व विधायकों को मौका दिया है । प्रदेश की आरक्षित विधान सभा में नर्मदापुरम जिले की पिपरिया विधान सभा भी शुमार है इस सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है पहली सूची में इस विधानसभा से वर्तमान विधायक का नाम नहीं होना ये बताता है कि इस विधान सभा में सब ठीक नहीं है । जानकारों की माने तो संघठन इस सीट पर विधान सभा चुनाव में जीत पक्की नहीं मान रहा इस लिहाज से इस पहली सूची में भाजपा की पराम्परिक इस आरक्षित विधान सभा सीट में अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया ।
पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक़ पिपरिया विधान सभा में कार्यकर्ताओं से लेकर पार्टी पदाधिकारियों की नाराजगी हाई कमान तक जा पहुंची है , इस लिहाज से आज की सूची में इस विधान सभा को शामिल नहीं किया गया । पार्टी किसी भी हालत में प्रदेश की कोई भी सीट गवाना नहीं चाहती इसलिए पिपरिया के नाराज पदाधिकारियों को गंभीरता से ले रही है । पहली सूची से आरक्षित पिपरिया विधान सभा सीट का नाम नहीं होना ये दर्शाता है कि वर्तामन विधायक का विरोध और विधान सभा चुनाव में जीत हार पर गहराई से मंथन जारी है ।
अब देखना होगा इस आरक्षित विधान सभा पिपरिया में कौन विधान सभा का उम्मीदवार होगा क्या वर्तमान विधायक को ही टिकिट मिलती है या बगावती तेवर दिखाने वाले प्रत्याशी बदलवा पाते हैं ….