नीलेंद्र मिश्रा भोपाल ब्यूरो…..प्रदेश में पटाखों के विकल्प के तौर पर कार्बाइड गन का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे 150 से ज़्यादा लोगों की आंखों की रोशनी गंवाने की कगार पर हैं विशेषज्ञों का कहना है कि इससे निकलने वाली गैस आँखों के लिए हानिकारक है…..
प्रदेश में बिकी सस्ती और जानलेवा कार्बाइड गन ने कई परिवारों की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया है । भोपाल के अस्पतालों समेत प्रदेश भर में 150 से ज्यादा लोग, खासकर बच्चे और नौजवान, इसकी चपेट में आकर अपनी आंखों की रोशनी गंवाने की कगार पर हैं । चिंता की बात यह है कि इतने गंभीर खतरे के बावजूद प्रशासन की नींद तब टूटी जब सैकड़ों लोग घायल हो गए, जिससे व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं । भोपाल के अस्पतालों में आने वाले रोगियों की रिपोर्ट में बताया गया है कि सैकड़ों में से 20–30 प्रतिशत मामलों में गंभीर डैमेज देखा गया है । कई लोगों को तत्काल ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ी और कुछ मामलों में कॉर्निया ट्रांसप्लांट तक करना पड़ा है । जिन्हें मामूली जली हुई चोटें थीं, उन्हें पट्टी कर घर भेज दिया गया है, लेकिन गंभीर मामलों के लिए अब ऑपरेशन और फॉलो-अप की तैयारी जारी है ।
खिलौना नहीं, छोटा बम है कार्बाइड गन….
बाजार में मिलने वाली देसी कार्बाइड गन, जिसमें गैस लाइटर, प्लास्टिक पाइप और कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग किया जाता है, खिलौना नहीं बल्कि घातक विस्फोटक है। पानी से मिलते ही एसिटिलीन गैस बनती है और चिंगारी के संपर्क में आकर विस्फोट करती है। गन के प्लास्टिक पाइप फटने पर छोटे-छोटे टुकड़े छर्रों की तरह आंखों, चेहरे और शरीर में घुस जाते हैं ।
यह कोई खेल नहीं है। देसी पटाखा गन सीधे आंखों की रोशनी छीन सकती है। कई बच्चों को आईसीयू तक में भर्ती करना पड़ा है। डॉक्टरों की भाषा में ये चोट बच्चों की आंखों की रोशनी भी छीन सकती है।
डॉ. मनीष शर्मा सीएमएचओ हमीदिया अस्पताल
माता-पिता के लिए जरूरी संदेश….
डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को ऐसे ट्रेंड से दूर रखें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही जिंदगीभर के अंधेरे में बदल सकती है।












