आशीष रावत…..राज्य सरकार के दस्तावेजों, फाइलों और विभागीय कामकाज में जिले का नाम Sagar दर्ज होता है, जबकि केंद्र सरकार के कई विभागों में अब भी इसे Saugor के नाम से लिखा जाता है. यही कारण है कि आम नागरिकों को अक्सर दस्तावेज़ बनवाने से लेकर रेलवे रिजर्वेशन तक, कई मामलों में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है…..

सागर जिला वैसे तो अपनी ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां के लोग पिछले कई सालों से एक अजीबोगरीब समस्या से जूझ रहे हैं । दरअसल सागर का नाम हिंदी में तो सागर ही है, लेकिन अंग्रेजी में इसके दो नाम प्रचलन में हैं Sagar और Saugor हैरानी की बात यह है कि दोनों नाम आधिकारिक तौर पर मान्य भी हैं । सबसे बड़ी परेशानी रेलवे यात्रा के दौरान सामने आती है । जब भी यात्री ऑनलाइन टिकट बुक करते हैं या ट्रेन की जानकारी खोजते हैं, तो अंग्रेजी में Saugor टाइप करना पड़ता है. वहीं, कई बार लोग केवल Sagar सर्च करते हैं, जिससे उन्हें सही जानकारी नहीं मिल पाती है. इससे यात्रियों को ट्रेन समय, टिकट बुकिंग और यात्रा योजनाओं में खासी कठिनाई होती है ।

स्थानीय लोग लंबे समय से एक समान नाम की मांग कर रहे हैं । उनका कहना है कि जब देश आजाद हो चुका है तो शहर के नाम को लेकर यह औपनिवेशिक छाया अब खत्म होनी चाहिए खासकर रेलवे और केंद्रीय विभागों को नाम एकरूप करना चाहिए, ताकि आम जनता को परेशानी से निजात मिल सके । कुल मिलाकर, सागर का यह ‘दो नामों वाला विवाद’ लोगों के लिए पहचान का संकट बन गया है. जनता अब उम्मीद लगाए बैठी है कि सरकार जल्द ही इस मसले का स्थायी समाधान निकालकर सागर को एक ही नाम से पहचाने जाने की दिशा में कदम उठाएगी ।