( पंकज पाल संवाददाता  )

 

 

पिपरिया – द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश पिपरिया श्रीमति अर्चना रघुवंशी के न्यायालय द्वारा आरोपी हल्कोरी उर्फ हरिराम को धारा 5/6 सहपठित धारा 10 पॉक्सो एक्ट में 10 वर्ष का कारावास व 2000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया ।

 

मामले मे शासन की ओर से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक एवं ( एडीपीओ ) बाबूलाल काकोड़िया बताया की पीड़ित बालिका की मां ने मंगलवारा थाना पिपरिया में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी सास को 17.02.23 को गांव के लोगों से सुनने को मिला कि पीड़ित बालिका के साथ उनके गांव के हल्कोरी पटेल द्वारा हनुमान मंदिर में दोपहर लगभग 1 से 2 बजे के बीच छेड़छाड़ की थी जिसे उनके गांव के ही निवासी धर्मेंद्र द्वारा देखा था तब उक्त संबंध में धर्मेंद्र से बातचीत किए जाने पर उन्होंने बताया कि हलकोरी की पेंट खुली हुई थी और वह पीड़िता की गर्दन पकड़कर उसका मुंह उसके प्राइवेट पार्ट के पास ले जा रहा था परंतु उसे देखकर हलकोरी ने पीड़िता को छोड़ दिया था फिर उसने उसे मंदिर से भगा दिया उसने उक्त घटना के संदर्भ में मंदिर के बाहर बैठे अमरचंद व सरदार सिंह को भी बताया था तत्पश्चात पीड़ित बालिका की मां ने उसकी सास सहित आरोपी हल्कोरी के घर जाकर उस घटना के बारे में पूछे जाने पर उसने गलती स्वीकार कर उसकी सास से माफी मांगी थी इस दौरान गांव वालों द्वारा यह कहा गया था कि वे लोग अभी उसको उक्त कृत के संदर्भ से सामूहिक रूप से को दंडित करेंगे परंतु घटना के दूसरे दिन से ना तो अभियुक्त गांव में दिखा था और ना ही उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई हुई ।

 

उक्त रिपोर्ट के आधार पर मंगलवारा थाना ने अपराध क्रमांक 60/ 23, पर अंतर्गत धारा 354, 354 (ए) भादवि तथा धारा 9 सहपठित धारा-10 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 का प्रकरण आरोपी हल्कोरी उर्फ हरिराम के विरुद्ध पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया, विवेचना उपरांत आरोपी के विरूद्व 354, 354 (ए), 376 एबी, 511 भादवि तथा धारा 5/6,18, 11/12, 9 सहपठित धारा-10 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत अभियोग पत्र न्यायालय मे पेश किया गया था, इस मामले मे अभियोजन द्वारा न्यायालय मे 10 अभियोजन साक्षियो के साक्ष्य कराये गये थे न्यायालय द्वारा अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य एवं तर्को से सहमत होकर आरोपी हल्कोरी उर्फ हरिराम को दण्डित किया गया, प्रकरण मे सशक्त पैरवी विशेष लोक अभियोजक एवं ए.डी.पी.ओ. बाबूलाल काकोड़िया द्वारा की गई ।